Matlabi Shayari : Matlabi Log Duniya Shayari

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tum yaad nahi karte to hum gila q kren
khamoshi bhi ek adaa hai mohubaat nibhane ke liye
तुम याद नहीं करते तो हम गिला क्यू करें
ख़ामोशी भी एक अदा है मोहबात निभाने के लिए

wo mahesoos kren hamko apni dhadkan ke andar
iske siva humne kuch chaha hi nahi
वो महसूस करें हमको अपनी धड़कन के अंदर
इसके सिवा हमने कुछ चाहा ही नहीं

Matlabi Shayari

Matlabi Shayari

मतलबी दुनिया में लोग अफसोस से कहते है की,
कोई किसी का नही…?
लेकीन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए

Matlabi Shayari

मतलबी दोस्त शायरी
VO ‘DOST’ JO DOSTI MEIN YU BAIMAAN HUA KARTE HAI
KYA MALUM THA DOSTI BHI MATLAB SE KIYA KARTE HAI

JAB HOTI HAI ZARURAT TOH VO ‘DOST’ BADHATE HAI HAATH
MATLAB NIKAL JAANE PAR WAHI HAATH KHEECH LIYA KARTE HAI

LABON PAR LE KAR MUSKAAN ‘DOST’ AATE HAI KARNE SALAAM
PHIR MATLAB NA HO TOH NAZREN PHER LIYA KARTE HAI

YAA KHUDA MAAF KAR DENA UNN GUSTAAK DOSTON KO JO
DOSTI KA NAAM ‘DOST’ BAN KAR BADNAAM KIYA KARTE HAI

JAA AYE DOST TUM KHUSH RAHO HUMSE KARKE YU DAGA
TERI KHUSHI KI HUM AAJ BHI DIL SE DUA KARTE HAI


जरूर एक दिन वो शख्स तड़पेगा हमारे लिए…
अभी तो खुशियाँ बहोत मिल रही है उसे मतलबी लोगो से

Khudgarz Shayari

कौन किसको दिल में जगह देता हैं,
सूखे पत्ते तो पेड़ भी गिरा देता हैं,


वाकिफ हैं हम दुनिया के रिवाजो से,
मतलब निकल जाये तो हर कोई भुला देता हैं

Khudgarz Shayari

कुछ यूँ हुआ कि.जब भी जरुरत पड़ी मुझे
हर शख्स इतेफाक से.मजबूर हो गया


दुनिया बहुत मतलबी है,
साथ कोई क्यों देगा,

Khudgarz Shayari

मुफ्त का यहाँ कफ़न नहीं मिलता,
तो बिना गम के प्यार कौन देगा


मुझको छोड़ने की वज़ह तो बतादे
मुझसे नाराज़ थे या मुझ जैसे हजारो थे

Khudgarz Shayari

भुला देंगे तुम्हे भी जरा सब्र तो कीजिए
आपकी तरह मतलबी होने में जरा वक्त लगेगा

khudgarz insaan shayari


चिठ्ठी ना कोइ संदेस जाने वो कौन सा देस जहां तुम चले गए हो
इस दिल पे लगा के ठेंस जाने वो कौन सा देस जहां तुम चले गए हो


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